गुरुवार, 6 अक्टूबर 2022

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जग जीत ही लेंगे हम जब साथ तुम्हारा है
दिल प्रेम भरा अपना फिर कल तो हमारा है।।1।।

था जुर्म निगाहों का तस्वीर बसी उनकी
दिल आह भरे हरदम नादान बेचारा है।।2।।

यौवन से भरी लहरें हैं चाँद  दिवानी जो
है चाँद तो बादल का, लहरों को किनारा है।।3।।

बारिश थमी है जब से गुंजार भ्रमर करते
कलियों ने ली अंगड़ाई प्रियतम का इशारा है।।4।।

ये धूप सलोनी सी लुकछिप के बिखरती यूँ
अब आँख मिचौली का‌ अलमस्त नज़ारा है।।5।।

संध्या सजी चूनर में हाथों में रची लाली
सूरज पिया ले भाँवर सहबाल सितारा है।।6।।

फूलों से भरी वादी लथपथ पड़ी थी बरसों
घावों पे लगी मरहम खिलना जो दुबारा है।।7।।


शर्मिला चौहान
ठाणे (महाराष्ट्र)

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