बुधवार, 24 अगस्त 2022

122 122 122 122 पर ग़ज़ल

122 122 122 122

रहे साथ हरदम सहारा वो सच्चा
निभा प्रीत ले जो है यारा वो सच्चा।।1।।

गगन में चमकते हजारों हैं तारे
तके चाँद इकटक सितारा वो सच्चा।।2।।

थे ईमान कायम उसूलों के चलते
रहीं तंग जेबें गुज़ारा वो सच्चा।।3।।


धनक सात रंगी धरा मेघ सूरज
दे खुशियांँ दिलों को नज़ारा वो सच्चा।।4।।

कमी प्रेम की से दरारें बढ़ीं अब
जो रिश्तों को जोड़े है गारा वो सच्चा।।5।।

हुई शाम बिछड़े जमीं और सूरज
मिलेंगे सुबह फिर इशारा वो सच्चा।।6।।

करूँ पार कैसे अनोखा ये सागर
मिले चंद को ही किनारा वो सच्चा।।7।।


शर्मिला चौहान

शनिवार, 20 अगस्त 2022

221 1221 1221 122

मार्गदर्शन के बाद संशोधित ग़ज़ल 🙏 धन्यवाद आदरणीय अनिल सर।



ये देश हमारा बड़ा बलवान सिपाही
सरहद पे वतन की लुटा दे जान सिपाही।।1।।

शूरों के जो किस्से सुने दादा की ज़ुबाँ से
 हित देश का बचपन में लिया ठान सिपाही।।2।।

जब प्रेम युगल गीत जुबानों पे चढ़े थे
तब गीत वतन का करे मुखगान सिपाही।।3।।

होली पे उड़े रंग गुलालों के फुहारे
निज रक्त से सीमा को रहा सान सिपाही।।4।।

जागे जो लखन सा रखे निद्रा पे कडा़ वश
सीता है धरा रूप रखे भान सिपाही।।5।‌

मौसम हो कोई भी रहे मुस्तैद सदा वो
घुटने हो जमी बर्फ़ खड़ा शान सिपाही।।6।।

जय घोष करे हिंद का दुश्मन की जमीं पे 
लिपटा जो तिरंगे में बढ़ा मान सिपाही।।7।।

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शर्मिला चौहान

1222 1222 1222 1222

1222 1222 1222 1222

हुई ग़लती कभी खुद से तो झुठलाया नहीं करते
दुबारा भूल से वो काम दुहराया नहीं करते।।1।।

मिले सम्मान ना कोई न आँखें नेह भीगीं हों
करीबी लाख हो रिश्ता वहाँ जाया नहीं करते।।2।।

चली जब ज़ोर की आँधी बुझे दीपक हजारों तब
अमावस मौन बैठी दीप बतियाया नहीं करते।।3।।

करें सेवा जो औरों की लुटाते प्रेम जीवन भर
बड़ाई में स्वयं के गीत वो गाया नहीं करते।।4।।

समय के साथ जो चलते लगाकर होड़ खुद से ही
मिले मंज़िल वो परचम आप फहराया नहीं करते।।5।।

सभी को साथ ले चलते रखें ना भेद कोई भी
किसी को स्वार्थ की खातिर वो बहकाया नहीं करते।।6।।

चलो आगे बढ़ें रस्ता करें तैयार मिलकर सब
नई पीढ़ी को लेने साथ शरमाया नहीं करते।।7।।


शर्मिला चौहान