सोमवार, 27 दिसंबर 2021

12122 12122 12122 12122(सुनाई देती है जिसकी धड़कन हमारा दिल या तुम्हारा)

बहर १४ प्रथम प्रयास 🙏
१२१२२  १२१२२ १२१२२ १२१२२

सुबह सवेरे धरा महकती, कमल नया नित खिला हुआ है
नयन उठाकर निहार मानव, गगन में सूरज उगा हुआ है।।1।।

कहाँ से देखो हवा है आई, कि उनका आँचल लगा सरकने
समा गई जो बदन की खुशबू, ये दिल दिवाना बना हुआ है।।2।।

मिलन की बातें धरा गगन की, टपक रहा प्रेम ओस बनकर
सुबह लजाई धरा को देखा, सफेद आँचल भरा हुआ है।।3।।

निकल पड़ी नद पिया मिलन को, चली किनारों को साथ लेकर
मिठास भर दी हृदय की अपने, खुशी से सागर बढ़ा हुआ है।।4।।

उठीं जो लहरें मचल के भागीं, लिपट रहीं वो किनारों से अब
नहीं रहा दूर अब किनारा, समा लहर में छुपा हुआ है।।5।।

शर्मिला चौहान

शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021

11212 11212 11212 11212

इस बहर पर पहला प्रयास सादर है। 🙏(मार्गदर्शन के बाद संशोधित)

11212  11212 11212  11212

कहीं दूर से जो दिखी मुझे, वो करीब इतने यूँ आ गई
न नज़र मिली न पलक झुकी, मेरे मन में फिर भी समा गई।।1।।

जो लिपट रही हवा सर्द सी, लगी आग यूँ जला तन बदन
वो तपिश तेरी थी निगाहों की, मुझे इस कदर जो जला गई।।2।।

खुली लट किसी की जो दूर जब, मेरे दिल को अब तो भाने लगी
 चली फिर बयार जो झूमती, पता उनका मुझको बता गई।।3।।

न मलाल था न कोई खुशी, जो मिली न तू तो कटी यूं ही
मेरे हाथ में तेरा हाथ अब, यही जिंदगी मुझे भा गई।।4।।

सुने खूब किस्से कहानियांँ, पढ़े   नगमे गीत रुबाइयाँ
तेरे थरथराते लबों की धुन, मुझे प्रेम राग सिखा गई।।5।।


शर्मिला चौहान

बुधवार, 8 दिसंबर 2021

बहर_ 122 122 122 122

पटल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराती मेरी एक प्रस्तुति 🙏


122  122  122  122

विविध फूल सुंदर खिलें नित चमन में
धरा देख उनको रहे मन मगन में।।१।।

कली मुस्कुराती प्रणय राग सुनकर
गजब का है जादू भ्रमर की छुअन में।।२।।

शिखर गर्व करता दिखूँ सबसे सुंदर
दबी मौन है नींव नीचे भवन में।।३।।

लिए है परीक्षा चतुर्थी का चंदा
कमी ना दिखाती ये ललना लगन में।।४।।

दिखे चाँद दूधिया सराहे ये दुनिया
सितारों से रौनक बढ़ी है गगन में।।५।।


लगे दिल को अपना हमेशा से चंदा
करे शीत मन को विरह की तपन में।।६।।

हवा खाद पानी ज़रूरी तरू को
पनपते न पौधे कभी भी सघन में।।७।।

शर्मिला चौहान