गुरुवार, 22 जुलाई 2021

ग़ज़ल 1222 1222 122

1222  1222  122

बुजुर्गों की जुबानी सब सुना है
गुलामी में वतन ने जो सहा है।1।
 
दुखों की रात इक लंबी बिता कर
सुबह की आस में भारत जगा है।2।

विदेशी ताकतों से लुट के देखो 
वतन अपनों से ही अब लुट रहा है।3।

जिसे सोने की सब कहते थे चिड़िया 
पसारे हाथ अब वो मांगता है।4।

जिन्होंने जान दे दी इसकी खातिर 
शहीदों को वतन भूला पड़ा है।5।

शर्मिला चौहान

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