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बुजुर्गों की जुबानी सब सुना है
गुलामी में वतन ने जो सहा है।1।
दुखों की रात इक लंबी बिता कर
सुबह की आस में भारत जगा है।2।
विदेशी ताकतों से लुट के देखो
वतन अपनों से ही अब लुट रहा है।3।
जिसे सोने की सब कहते थे चिड़िया
पसारे हाथ अब वो मांगता है।4।
जिन्होंने जान दे दी इसकी खातिर
शहीदों को वतन भूला पड़ा है।5।
शर्मिला चौहान