रविवार, 31 दिसंबर 2023

चिकीर्षा पोटली

गणपति छप्पन भोग २०२३

"गणपति छप्पन भोग वंदना २०२३"

आना आना गणपति, भोग लगाने आना।।
लाना लाना गणपति, रिद्धि सिद्धि लाना।।


 सिर पर मुकुट चमाचम चमके
 मस्तक सिंदूर दमदम दमके।
हाथों में कंगन, पाँवों में पायल
बुद्धि का सारा जग कायल।।

आना आना गणपति, मूषक लेकर  आना।
लाना लाना गणपति रिद्धि सिद्धि  लाना।।१।।

पाँच दिवस का पूजन करते
भक्ति भाव से तन मन भरते।
धूप दीप नैवेद्य आरती
जग में फैली तुम्हारी कीर्ति।।
प्रेम भाव से पूजें तुमको
चरणों में अपने, जगह दो हमको।।


आना आना गणपति भोजन करने आना।
लाना लाना गणपति रिद्धि सिद्धि लाना।।२।।


विविध विविध पकवान बनाएंँ
थाल आरती भोग सजाएंँ।
लड्डू पूरन पोली, भात
अप्पम शीरे की क्या बात।

इडली ढोकला और मुंगोडी
पराठा, रोटी, बेसन पूड़ी।
रंग बिरंगी खट्टी मीठी
बहुत प्रकार बनी है चटनी।

आना आना गणपति, मुँह मीठा करके जाना।
लाना लाना गणपति रिद्धि सिद्धि लाना।।३।।

भात पुलाव, संग फुल्का रोटी
केक , संदेश और बर्फी मोटी।
नाना प्रकार सजी है थाल
गणपति आकर करो निहाल।।

दाल बड़ा, भजिया कटलेट
बप्पा तुम ना करना लेट।
मेदु वडा, सांभर और मेवा
फल, मोदक से प्रसन्न हैं देवा।

आना आना गणपति रुचि रुचि भोग लगाना।
लाना लाना गणपति रिद्धि सिद्धि लाना।।४।।

नींबू पानी, दाल पकवान 
 मुख में रचता मीठा पान।
छप्पन भोग मान सम्मान 
गौरीसुत तेरा गुणगान।।

सुंदर शुभ उत्सव संयोग
आज लगाते छप्पन भोग।
हाथ जोड़ स्तुति सब करते
चरणों पर हम शीश हैं धरते।

आना आना गणपति आशीष देने आना।
लाना लाना गणपति रिद्धि सिद्धि लाना।।
लाना लाना गणपति रिद्धि सिद्धि लाना।।

"गणपति बप्पा मोरया।।
मंगलमूर्ति मोरया।।

।।सभी भक्तगण निहारिका।।

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