शुक्रवार, 11 नवंबर 2022

2212 2212 2212 2212 पर ग़ज़ल

2212  2212  2212  2212

आकाश की छाती से जब, टूटा कोई तारा दिखा
दुनिया की भारी भीड़ में,  किस्मत का इक मारा दिखा।।1।।

बाजी लगाकर जान की, रक्षा करे दिन रात जो
माँ भारती का पूत वो, सबसे अधिक प्यारा दिखा‌‌।‌2।।

रख ताक पर सारे नियम, खेला करे जो बन कुटिल
वो जीत कर बाजी सभी, सबसे बड़ा हारा दिखा।।3।। 

भीतर कहीं जब कोख में, मसली गईं थीं बेटियांँ
मेला बगीचा बाग बन, सूना सा चौबारा दिखा।।4।।

अख़्तर शुमारी रात भर, इक दौर ऐसा भी रहा
तारों में चमका चाँद जब, उसमें मुझे यारा दिखा‌।5।।

इस चिलचिलाती धूप में, निष्प्राण नदियाँ शुष्क वन
नंगे बदन पर्वत खड़े, सूरज का ही पारा दिखा।।6।।

काँधे पे बस्ता लादकर, अब चल पड़ीं हैं बेटियांँ
कदमों को उनके चूमता, जग आज ये सारा दिखा।।7।।


शर्मिला चौहान
ठाणे (महाराष्ट्र)