मंगलवार, 15 फ़रवरी 2022

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२ गज़ल

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२

मुसाफ़िर साथ में कोई, हमारे जो चला होता।
मज़ा आता सफ़र का तब, बढ़ा ये हौसला होता।।१।।

शिकायत अब करें भी क्या, सुनेगा कौन इस दिल की।
कभी कहते कभी सुनते, अगर साथी भला होता।।२।।

उनींदी सी रहीं आँखें, कई रातें कटीं जगकर।
झपक लेते कभी पलकें, कोई सपना पला होता।।३।।

रहा होता सदा रौशन, हमारा दिल मुहब्बत से।
किसी के प्यार का दीपक, कभी दिल में जला होता।।४।।

दवा भी खूब मिल जाती, दुआ भी काम आ जाती।
किसी ने गर मुहब्बत में, कभी हमको छला होता।।५।।

चमकता नूर चेहरे पर, दिलों पर रंग चढ़ जाता।
कभी वो रंग उल्फत का, किसी ने जो मला होता।।६।। 

गज़ल नज़्में कभी कहते, सुनाते गीत चाहत के।
हमारी भावनाओं में, कभी कोई ढला होता।।७।।

शर्मिला चौहान