आना-जाना, इस लोक में ,
शाश्वत कितना बताते हो ।
पूजा पाठ , भाव-भक्ति से ,
जीवन यथार्थता समझाते हो ।
बिना गणेश के कुछ साध्य नहीं होता ,
गणपति तुम्हारा विसर्जन कभी नहीं होता ।।
गणाधिपति होकर , सांसारिक होना ,
लड्डू , मोदक का मीठापन देना ।
जासवन -दूर्वा, प्रकृति की तेज-शीतलता ,
सब आत्मसात कर लेते हो ।
देवताओं का भी कोई और आराध्य नहीं होता ,
गणपति तुम्हारा विसर्जन कभी नहीं होता ।।
बाल गणपति , महाकाय गणपति
शांत, सौम्य और रौद्र गणपति ।
श्रवण की प्रथम सीढ़ी से
आत्मनिवेदन तक ले जाते हो।
"गणेश" जैसा गूढ़ आध्यात्म नहीं होता ,
गणपति तुम्हारा विसर्जन कभी नहीं होता ।।
मुनिगण ,संत, देवता , नारद
शेष ,शारदा स्वयं जगपालक ।
प्रतिपल पूजा करते जिनको ,
हम सब माने अपना उनको ।
हर शुभ काज में साथ निभाना ,
अगले बरस तुम जल्दी आना ।
अगले बरस तुम जल्दी आना ।।
"गणपति बप्पा मोरया
अगले बरस तू जल्दी आ ।।
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छप्पन भोग २०१९
"गणपति छप्पन भोग"
गणपति की सेवा, मंगल मेवा,
सेवा से सब विघ्न टलें ।
छप्पन भोग की थाल सजाएं ,
भक्त खड़े जयकार करें ।
बुद्धि विधाता, शुभ फल दाता ,
सबके कारज सिद्ध करे ।
मूषक वाहन आप विराजें ,
सकल सृष्टि में भ्रमण करें ।
श्यामल रूप धरयो गणपति जी ,
शांत मुद्रा में लीन रहयो ।
अभय हस्त धर दीज्यो हम पर,
सदा सदा सिर नाए खड़े ।
रंग बिरंगे, विविध स्वाद के ,
छप्पन भोग अनूप लगे ।
भोग लगाओ सिद्धिविनायक ,
भोग प्रसाद अमृत बने ।
मीठा, खट्टा, तीखा फीका ,
सब प्रकार नैवेद्य धरें ।
कृपा दृष्टि करदो व्यंजन पर ,
हम भक्तों की आस रहे ।
हलुआ-पूरी , छोले राजमा ,
खीर पुलाव, पकौड़े चने ।
वडा, ढोकला, दाल-बाटी है ,
चटनियों के कई रूप बने ।
पूरनपोली, अप्पम रायता ,
इडली, उत्तपम , खूब सजें ।
फल मेवा पकवान मिठाई ,
संग सलाद से रचे बसे ।
विविध सब्जियां, आलू , गोभी ,
सुंदर दाल पकवान बने ।
गुलाब जामुन, केसरी हलुआ ,
कटलेट बड़े चटक बने ।
लड्डू, मोदक, शकरपारे ,
सेव- बूँदी , गुलगुले भले ।
साबूदाना, सुनदाल ,भाजी ,
कढ़ी, वड़ी ,मुंगोड़े तले ।
रोटी, थेपले ,पंचखाद्य और
दूध, दही सब भोग चढ़े ।
केक, मटर और सांभर सुंदर,
भात के हैं कई रूप बढ़े ।
अचार ,पापड़ , स्वाद बढाए ,
तांबुल धरे मुखवास हैं ।
भोजन नहीं भावना मन की ,
गणपति आस विश्वास हैं ।
यथाशक्ति, संपूर्ण भाव से ,
सब कुछ भोग चढ़ाया है ।
आकर भोग लगाओ गणपति ,
भोग बड़ा मनभाया है ।
भोग लगे जब गणेश जी को,
भोग प्रसाद बन जाता है ।
यह प्रसाद जो खा लेवे तो ,
सब अमृत हो जाता है ।
शुभ के कर्ता, विघ्न-विनाशक ,
सिर झुकाए तेरे द्वार खड़े ।
जो तुझको नित ध्यावै गणपति ,
विपत्ति कभी ना आन पड़े ।
तुझको पूजें, तुझको ध्यावै ,
हर पल तेरा ध्यान धरैं ।
छप्पन भोग में बाट निहारें ,
भक्त सभी तेरे द्वार खड़े ।
गणपति की सेवा, मंगल मेवा ,
सेवा से सब विघ्न टरै ।
छप्पन भोग लग गया गणपति ,
भक्त खड़े जयकार करें।
सब भक्त खड़े जयकार करें ।
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सभी गणेश भक्त
निहारिका गणेशोत्सव
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