श्यामल गात अधर लालिमा ,
पीली चूनर लपेट,वसुधा सकुचाई ।
चली बलखाती पिया मिलन को ,
सखी , वसंत ऋतु आई ।।
किसलय दहकते अंगारे-से ,
झूम-झूम मदमाते कुसुम ।
फगुनाई बयार मंद-मंद ,
उन्मत्त सुवास भर लाई ।
सखी , वसंत ऋतु आई ।।
मधुर गुंजन भ्रमर गीत का ,
आसक्त मन अलि कली का ।
अमराई बौराई ठगी-सी ,
कोयल ने कूक लगाई ।
सखी , वसंत ऋतु आई ।।
आँचल से लिपटे पलाश ,
ज्यों अमावस में प्रकाश ।
ढोल थाप, अबीर-गुलाल ,
फागुन ने अगन दहकाई ।
सखी , वसंत ऋतु आई ।।