शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

"वसंत ऋतु आई"

श्यामल गात अधर लालिमा ,
पीली चूनर लपेट,वसुधा सकुचाई ।
चली बलखाती पिया मिलन को ,
सखी , वसंत ऋतु आई ।।

किसलय दहकते अंगारे-से ,
झूम-झूम मदमाते कुसुम ।
फगुनाई बयार मंद-मंद ,
उन्मत्त सुवास भर लाई ।
सखी , वसंत ऋतु आई ।।

मधुर गुंजन भ्रमर गीत का ,
आसक्त मन अलि कली का ।
अमराई बौराई ठगी-सी ,
कोयल ने कूक लगाई ।
सखी , वसंत ऋतु आई ।।

आँचल से लिपटे पलाश ,
ज्यों अमावस में प्रकाश ।
ढोल थाप, अबीर-गुलाल ,
फागुन ने अगन दहकाई ।
सखी , वसंत ऋतु आई ।।