प्रिय पाठकों ,
शर्मिला चौहान का सप्रेम नमस्कार ।
आज आप सभी से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ कर मैं बहुत गौरव का अनुभव कर रही हूँ ।हिंदी भाषी होने के कारण हिंदी साहित्य में अभिरुचि होना स्वाभाविक ही है ।अपने भावों एवं विचारों को अभिव्यक्त करने का ,साथ ही लेखन के क्षेत्र में नवीन होने के कारण समकालीन विचारों एवं विषयों को जानने की उत्सुकता ने आज मुझे ई-कलम से जोड़ दिया ।
2-3 वर्षों तक औरंगाबाद से प्रकाशित होने वाले हिंदी समाचार पत्र लोकमत समाचार में महिलाओं एवं बच्चों पर लेख , कहानियाँ प्रकाशित होती रही ।बीच के कुछ लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर अपने दिल की कही-अनकही बातें, भावनाएँ लेकर मैं आप सब लोगों से जुड़ रही हूँ ।
दिल के उद्गार कभी विचार लेख, कभी कहानियाँ तो कभी कविताओं की निर्मल निर्झर से बह जाते हैं ।
आशा है आप मेरी भावनाओं को समझेंगे और समय समय पर उचित मार्गदर्शन भी करेंगे ।
कही अनकही में आपके सहयोग की आकांक्षी ....
शर्मिला चौहान .
गुरुवार, 8 अक्टूबर 2015
भूमिका
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आपको बहुत बहुत बधाई।
जवाब देंहटाएंहम सब आपकी रचनाओं को पढ़ने के लिए उत्सुक रहेंगें।
आपके इस नए प्रयोजन में आपकी ख्याति निरंतर बढे ऐसी ही कामना प्रभु से करते है।
आपको बहुत बहुत बधाई।
जवाब देंहटाएंहम सब आपकी रचनाओं को पढ़ने के लिए उत्सुक रहेंगें।
आपके इस नए प्रयोजन में आपकी ख्याति निरंतर बढे ऐसी ही कामना प्रभु से करते है।
प्रोत्साहन के लिए हार्दिक धन्यवाद ।।
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